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हेपेटाइटिस

हेपेटाइटिस एक वायरल रोग है, जिसे सामान्य तौर पर पीलिया भी कहते है ! यह लिवर का एक खतरनाक रोग है जिसकी वजह से भारत में हज़ारो लोगो की मौत होती है ! यह लिवर का एक खतरनाक रोग है, जिसमे हर साल हमारे देश में हज़ारो लोगो की मौत होती है ! हेपेटाइटिस के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 28 जुलाई को वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे यानी विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है।इस रोग के कारण लिवर में सूजन आ जाती है।लोगो में इस बीमारी को लेकर जो अज्ञानता फैली है उसके कारण यह बीमारी धीरे धीरे बढ़ती जा रही है ! भारत में लोग जब इस बीमारी से ग्रस्त होते है तो ज्यादातर लोग घरेलु नुस्खों से इसे ठीक करने में लग जाते है ! लेकिन जब पीलिया के कारण लिवर पूरी तरह से खराब हो जाता है फिर डॉक्टर के पास जाते है !

लक्षण

  • बदन दर्द ,सर दर्द ,
  • कमजोरी, थकान ,
  • भूख कम लगना
  • खुजली,
  • बुखार, दस्त लगना या फिर कब्ज़ होना
  • जी मिचलाना, उल्टी आना
  • पेट में दर्द होना
  • काले रंग का मल आना
  • शरीर पर सूजन आना

कारण

अत्यधिक तेल मसाले युक्त भोजन का सेवन लिवर के लिए नुकसानदायक होता है।चटपटे एवं मिर्च मसालेयुक्त व्यंजन, वनस्पति घी ,बेसन एवं मैदे से बने व्यंजनों का सेवन एवं  का अधिक प्रयोग भी हानिकारक है।

धूम्रपान, किसी भी प्रकार का नशा या मांसाहार का सेवन लिवर के लिए बेहद हानिकारक होता है।

कई ऐसी दवाईया है जिनका सेवन लिवर की समस्याओं के लिए जिम्मेदार होती है। जैसे की पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक या ब्युटाजोलीडीन जैसी दवाईयों का अत्यधिक सेवन भी  लिवर को खराब कर सकता है।

प्रकार

हेपेटाइटिस 5 प्रकार के होते है !

  • हेपेटाइटिस A
  • हेपेटाइटिस B
  • हेपेटाइटिस C
  • हेपेटाइटिस D
  • हेपेटाइटिस E

इनमे से सबसे ज्यादा घातक हेपेटाइटिस B को माना जाता है ! क्यूंकि ये लिवर पर सीधा असर करता है जिससे लिवर को क्षति पहुंचाता है और इससे मरीज की मृत्यु तक हो सकती है।

हेपेटाइटिस रक्त में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ने के कारण होती है ! यह हमारे शरीर में पानी के प्रवेश द्वारा , माँ से बच्चे को , विषाणुयुक्त सुई , इत्यादि से होता है।

हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस E खाने और पानी के संकर्मण द्वारा होता है।

हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C रक्त में इस्तेमाल होने वाली चीजों से होती है जैसे की सुई का कीटाणुरहित न होना , माँ से बच्चे को होना , और शारीरिक संबंध इत्यादि से होता है।

बचाव के उपाए : 

आयुर्वेद में काफी उपाए हैं इसके लिए और कुछ सावधानियां बताई गई है जिन्हे करके इस बीमारी से निजात पा सकते है। भोजन पकाने और खाने से पहले और बाद में और शौचालय जाने के बाद अपने हाथो को अच्छी तरह से साफ़ कर लीजिये। खाने मे केला, आम, टमाटर, पालक, आलू, आंवला, अंगूर, मूली, नींबू, सूखे खजूर, किशमिश, बादाम और इलायची ज्यादा शामिल करें।अपने आस पास चारो तरफ सफाई का ध्यान रखिये। क्यूंकि पीलिया गंदगी से फैलता है, नाखून को समय समय पर काटते रहे। बाजार के फलो को और सब्जियों को अच्छी तरह से धोकर उनको काट कर फिर खाये , इससे हमारी शरीर के अंदर की सफाई बनी रहती है। गर्मियों में ताजा खाना ही खाएं, खुला खाना बिल्कुल नहीं खाना चाहिए ,गंदे, सडे-गले व कटे हुए फल भी नहीं खाने चाहिए और पीने का पानी साफ़ और स्वच्छ होना चाहिए | घर में चारो तरफ साफ़ सफाई का अधिक ध्यान रखे। ज्यादा तेल और मसाले वाली चीज़ों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हरी साग-सब्जियों का सेवन करना अति लाभकारी रहता है। आहार में कम वसायुक्त और प्रोटीन से भरपूर आहार लेना चाहिए। धूम्रपान और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए क्यूंकि इससे लिवर पर गहरा असर पड़ता है। 18 साल तक हर बच्चे को वक्सीनेशन का इंजेक्शन जरूर लगवाना चाहिए इससे हेपेटाइटिस B होने का खतरा 95 % कम हो जाता है। हमेशा पानी को उबाल कर पीना उचित रहता है।अपना टूथब्रश , शेविंग क्रीम ,ब्लेड और रेज़र इत्यादि किसी से शेयर नहीं करना चाहिए। आप घर पर बनाया ताज़ा फलों का रस और सूप भी पी सकते हैं। कच्चे नारियल का पानी, मूली के पत्तों का रस, ताजा छाछ, शहद, गन्ने का रस लेना चाहिए।

 

 

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