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पित्ताशय की पथरी (गॉल ब्लैडर स्टोन)

हमारे शरीर में पेट के भीतर राइट साइड में लिवर के नीचे एक छोटी सी थैली होती है जिसमे पित्त या बाइल जमा होता है ! इस थैली को ही पित्ताशय की थैली कहते है , इसी थैली के अंदर कुछ लोगो में पथरी का निर्माण होने लगता है और इनका आकार 20 मिमी तक हो सकता है, इसी को पित्ताशय की पथरी ( गॉल ब्लैडर स्टोन) कहते है ! इसी कारण पेट में असहनीय दर्द और पाचन से जुडी समस्या होने लगती है।

पित्ताशय की पथरी होने के कारण

पित्ताशय का प्रमुख कार्य पाचन क्रिया को संपादित करने के लिए पित्त को संचित करना है | किंतु पित्त में उपस्थित कोलेस्ट्रोल व रंगद्रव्य कभी-कभी ठोस आकार ग्रहण कर पथरी का रूप ले लेते हैं | ऐसा क्यों होता है ? इसका सही कारण विशेषज्ञों के अनुसार यह है कि जो व्यक्ति अधिक मात्रा में गरिष्ठ भोजन का सेवन करते हैं उनके रक्त में कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ जाने के कारण इस रोग की उत्पत्ति होती है |

लक्षण

पथरी में हर समय कष्ट का अनुभव नहीं होता है | पथरी के लक्षण समान्यतः वसायुक्त तथा गरिष्ठ भोजन करने के बाद ही दिखाई देते हैं | पेट के ऊपरी भाग में हल्का दर्द, पेट फूलना, वायु प्रकोप या कभी-कभी तीव्र पीड़ा, कमर दर्द, भूख कम लगना , पेट में जलन होना तथा मितली के लक्षण दिखाई देते है !

पित्ताशय की पथरी के प्रकार

1 कोलेस्ट्रोल की पथरी : पित्ताशय की पथरी के अधिकतर मरीजों में कोलेस्ट्रॉल की पथरी , अधिक मात्रा में पाई  जाती है और ये हरे -पीले रंग की होती है !

2 बिलिरुबिन / पिग्मेंट की पथरी : पित्ताशय में बाइल पड़े रहने से बिलिरुबिन जमा होकर छोटी छोटी पथरी का निर्माण करती है। इनका रंग गहरा काला या हरा होता है !

पित्ताशय की पथरी का इलाज

एलोपैथी में गॉल ब्लैडर स्टोन के लिए डॉक्टर्स ऑपरेशन ही बताते है और इसके लिए काफी पैसे भी लगते है और बाद में ऑपेरशन के बाद साइड इफ़ेक्ट नजर आने लगते है , बहुत मरीजों को खाना नहीं पचता है , पेट में गैस , एसिडिटी बनने की ज्यादा शिकायतें आने लगती है ! किन्तु आयुर्वेद में बिना पित्ते को निकाले आयुर्वेदिक औषधि के माध्यम से और कुछ उपाए बताकर जो की प्राकर्तिक तरीके से पथरी को अंदर तोड़ कर उसका चुरा बनाकर मूत्र मार्ग से पथरी निकाल देते है !

  • वसायुक्त गरिष्ठ भोजन, दूध आदि का सेवन न किया जाए |
  • आहार में सब्जी तथा फलों का सेवन अधिक करें |
  • कोलेस्ट्रोल की मात्रा घटाने के लिए लहसुन तथा नीबू के रस का सेवन अधिक करें |
  • चुकन्दर, गाजर और खीरे के रस का सेवन करना पथरी का एक अति उत्तम प्राकृतिक उपचार है | इन रसों के सेवन से पित्ताशय की ही पथरी नहीं वरन् गुर्दो की पथरी भी गलकर शरीर से बाहर आ जाती है |
  • अंगूर का सेवन भी गुणकारी है |
  • अनार के खट्टे तथा मीठे दोनों प्रकार के बीजों को पीसकर चूर्ण तैयार कर लें | चने के सूप के साथ एक-एक चम्मच दिन में दो बार देने से पथरी गलकर शरीर से बाहर आ जाती है |

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