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थाइराइड

थाइराइड गले में स्थित एक ग्रंथि (gland) का नाम है। यह ग्लैंड गले के आगे के हिस्से में मौजूद होता है और इसका आकार एक तितली के समान होता है। यह शरीर के कई तरह के  चयापचय (metabolic processes ) को नियंत्रित करने के काम आता है।

थाइराइड ग्रंथि  से प्रोडिउस होने वाले हॉर्मोन्स शरीर में होने वाले सभी मेटाबोलिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। थायराइड विकारों से घेंघा जैसी छोटी बीमारी से लेकर जानलेवा कैंसर तक हो सकता है। लेकिन जो सबसे अधिक पाये जाने वाली थायराइड प्रॉब्लम होती है वो है थायराइड हॉर्मोन्स का सही मात्रा में प्रोडक्शन ना होना है। इसमें दो तरह की समस्या आती है

  1. Hyperthyroidism (हाइपरथायरायडिज्म / अतिगलग्रंथिता ): ज़रुरत से अधिक हार्मोन्स का पैदा होना
  2. Hypothyroidism (हाइपोथायरायडिज्म / अवटु-अल्पक्रियता): ज़रूरत से कम हॉर्मोन्स का प्रोडक्शन होना
  3. इन  समस्याओं की वजह से कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं, लेकिन अगर सही से इसका निदान करके इलाज किया जाए तो इन्हें अच्छे से मैनेज किया जा सकता है।थाइरोइड ग्लैंड से निकलने वाले हॉर्मोन्स शरीर के लगभग सभी हिस्सों को प्रभावित करते हैं, स्किन, ब्रेन, मसल्स, कुछ भी इससे अछूता नहीं है। इनका सबसे एहम काम होता है बॉडी द्वारा इस्तेमाल हो रही एनर्जी को कण्ट्रोल करना, जिसे हम मेटाबोलिज्म के नाम से जानते हैं। इसमें दिल कैसे धड़कता है, बॉडी का टेम्परेचर कैसे कंट्रोल होता है और हम कैसे अपनी कैलोरीज बर्न करते हैं,  ये सब शामिल है।

कारण

  • शरीर में आयोडीन की मात्रा कम या अधिक होने पर भी थायराइड की समस्या हो जाती है।
  • प्रदूषण के कारण भी थायराइड की बीमारी हो जाती है। गन्दगी और प्रदूषण के कारण हवा के माध्यम से विषैले जीवाणु हमारी थायराइड ग्रंथि को नुकसान पहुँचाते है।
  • दवाइयों के अधिक इस्तेमाल और दवाइयों के साइड इफ़ेक्ट से भी आपको थायराइड की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • थायराइड की बीमारी आनुवंशिक भी होती है। इसका मतलब है, कि अगर आपके परिवार में किसी को ये बीमारी है, तब भी आपको ये बीमारी होने के चांस है।

लक्षण

  • वजन बढ़ना
  • आँखों में रूखापन (आँखों में जलन, आँखों का लाल होना, खुजली होना और दर्द होना )
  • ज्यादा थकान महसूस करना
  • मासिक धर्म में बदलाव होना
  • यौन उत्तेजना खत्म होना

परहेज़

  • सफ़ेद नमक ना खाये। हमेशा सेंधा या काला नमक ही खाये।
  • नशीले पदार्थो का सेवन ना करे।
  • वनस्पति घी का सेवन करने से बचे।
  • रेड मीट का सेवन कभी ना करे।

उपचार

आयुर्वेद में बहुत उपाए है जिन्हे करके हम इस बीमारी को जड़ से ख़त्म कर सकते है ! हमारे संस्थान में डॉक्टर के द्वारा मरीज का पूरा परिक्षण करके उन्हें दवाई दी जाती है , यह दवाई पूरी तरह से 16 जड़ी बूटियों के मिश्रण से बनाई गयी है और इसके कोई भी साइड इफेक्ट्स नहीं है ! यह बीमारी की जड़ पर काम करता है और लोगो की उम्र भर चलने वाली दवाई को छुड़वाने में मदद करता है !

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