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इम्युनिटी फिट तो लाइफ रहेगी हिट

आपने देखा होगा की कैसे कुछ लोग अक्सर थके- थके से, बीमार और उम्र से पहले ही बुजुर्गों जैसा लुक लिए घूमते है, जबकि वही कुछ लोग अधिक उम्र के बावजूद चुस्त-दुरुस्त और युवा नज़र आते है। तो क्या आप इस बात से वाकिफ है की ऐसा क्यों है की कुछ लोग तो दिखने में स्वस्थ और तंदरुस्त है और वहीँ कुछ लोग निराशा से भरे और उदासीन दिखाई देते हैं इनके चेहरे पर रौनक तो मानो अरसों से गायब हो चुकी हो ? क्या आप इसके पीछे की वजह जानते है ? नहीं ! तो आज हमको बताते हैं की इन सबका मूल कारण क्या है और वो कारण है इम्युनिटी पावर। जी हाँ। आइए समझते है इम्युनिटी सिस्टम के बारें में।

क्या आप जानते हैं की जिन लोगों का इम्यून सिस्टम ठीक नहीं रहता है उनमे एजिंग के लक्षण जल्दी ही नजर आने लगते हैं, ना सिर्फ इतना इसका असर स्किन, हड्डियों, हार्ट, लंग्स, किडनी और अन्य अंगो पर नजर आने लगता है। कुछ समय पूर्व हुए एक शोध के अनुसार बड़ी उम्र के लोगों में असमय हुई मृत्यु के मुख्य कारणों में गंभीर संक्रमण, कैंसर और इन्फ्लेमेट्री डिजीज होते है। ये डिसऑर्डर मूल रूप से इम्यून सिस्टम की एजिंग के कारण पनपते है। इस स्थिती को चिकित्सकीय भाषा में ‘ इम्यून सेनसेन्स कहते है।

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सबसे पहले यह जानना जरुरी है की इम्युनिटी की परिभाषा क्या है ? इसका शरीर में क्या महत्व है और यह कैसे काम करती है ?

इम्युनिटी यानी प्रतिरोधक क्षमता, जो हमारे शरीर की टॉक्सिन्स और विभिन्न कीटाणुओं वायरस के संक्रमण से बचाती है। साधारण शब्दों में कहा जाए तो इम्युनिटी यानी शरीर का वह प्राकृतिक सिस्टम, जो शरीर को रोगों से दूर रखता है और शरीर में लगे हर रोग से शीघ्र बाहर निकलने में सहायता करता है। यह वो रक्षा कवच है, जो खांसीजुकाम और पेट लिवर के संक्रमण, हेपैटाइटिस, लंग इनफेक्शन, किडनी इनफेक्शन से दूर तो रखता है साथ ही कैंसर जैसे रोगों से भी शरीर का बचाव करता है।

इम्युनिटी बढ़ाने में शरीर के लिंफेटिक सिस्टम की बड़ी भूमिका होती है, जिसमें अस्थि-मज्जा, तिल्ली, थायमस और लिम्फ नोड्स आते हैं। लिंफोसाइट्स और ल्यूकोसाइट्स, ये छोटी सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं, जो शरीर को रोगों से बचाती हैं। शरीर में बी-सेल और टी-सेल दो तरह के लिंफोसाइट्स होते हैं। बी-सेल शरीर में उन एंटीबॉडी का निर्माण करते हैं, जो बैक्टीरिया व टॉक्सिन पर हमला करते हैं। वहीं टी-सेल संक्रमित और कैंसरजनित कोशिकाओं को नष्ट करते हैं। इम्युनिटी बढ़ाने की प्रक्रिया में इसी पूरे तंत्र को मजबूत करने की जरूरत होती है।

बारबार संक्रमण होना या ऐलर्जी :-

अगर आपको लगता है कि आप दूसरों की अपेक्षा बारबार बीमार होते हैं, जुकाम की शिकायत रहती है, खांसी, गला खराब होना या स्किन रैशेज जैसी समस्या रहती है तो बहुत पॉसिबल है कि यह आपके इम्यून सिस्टम की वजह से हो। कैंडिडा टेस्ट का पॉजिटिव होना, बारबार यूटीआई, डायरिया, मसूड़ों में सूजन, मुंह में छाले वगैरह भी खराब इम्यूनिटी के लक्षण हैं।

 

मौसम बदलते ही इम्युनिटी कमज़ोर होना :-

दलते मौसम के साथ साथ शरीर की इम्युनिटी कई तरह के रोगों से बचाव करती है लेकिन मौसम के बदलने के साथ ही इम्युनिटी पर प्रभाव पड़ना शुरू हो जाता है। वातावरण की नमी मच्छर, कीटाणु जीवाणुओं के पनपने के लिए अनुकूल होती है और फिर जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है उनके बीमार होने का खतरा बढ़ जाता है। जिन लोगों को शुगर, अस्थमा या कोई और बीमारी हो उन्हें ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है।

बचाव :-

जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है, उनके बीमार पड़ने का जोखिम बढ़ जाता है। जिन लोगों को शुगर , अस्थमा या लंबी बीमारी हो उन्हें ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है।आसपास साफसफाई, पोषक तत्वों से युक्त घर पर बने खाने और ज्यादा से ज्यादा पानी पीने से संक्रमण से दूरी बनाई जा सकती है। फाइबरयुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिलती है

स्ट्रेस से बचें :

 तनाव या स्ट्रेस से रोग प्रतिरोधक क्षमता पर नाकारात्मक असर पड़ता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो ने  लगती है। इसलिए स्वयं को तनाव मुक्त बनाए रखने के लिए योग, मैडिटेशन, और व्यायाम करें। इम्युनिटी बढ़ाने में व्यायाम की सकारात्मक भूमिका होती है। नियमित व्यायाम सिर्फ शारीरिक तौर पर, बल्कि मानसिक रूप से भी शरीर को मजबूत बनाता है। योगासन से मानसिक तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है।   

 

पूरी नींद लें :-

  • नींद से कोई समझौता करें। प्रातः जल्दी उठने की और सही समय से सोने की आदत डालें। हर रोज कम से कम 6-7 घंटे की नींद अवश्य लें। नींद शरीर की इम्युनिटी को स्वस्थ या बेहतर बनाए रखने में मदद करती है।
  • जीवनशैली में बदलाव लाएं और शारीरिक परिश्रम को महत्व दें।
  • जंक फूड, तले हुए खाद्य पदार्थप्रोसेस्ड या डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ, चीनी युक्त आहार, कैफीन, शराब, धूम्रपान और नशीले पदार्थों से दूरी बनाएं रखें

खाने में शामिल करें ये खाद्य पदार्थ  :-

  • ताजे फल इसका जूस पीएं।
  • ताज़ी सब्जियों के सलाद का सेवन करें।
  • हर्बल या ग्रीन टी या ब्लैक टी का सेवन करें।
  • कच्चा लहसुन खाना भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बूस्ट करने में सहायक होता है। इसमें पर्याप्त मात्रा में एलिसिन, जिंक, सेलेनियम और विटामिन ए व ई पाए जाते हैं।
  • नींबू और आंवले में पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को दुरुस्त रखने में मददगार होता है इसलिए इसको अपने खाने में शामिल करें  
  • अलसी का सेवन करें इसमें अल्फ़ालिनोलेनिक, ओमेगा-3, फैटी एसिड पाया जाता है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है
  • अंकुरित दाल का सेवन करें
  • मशरूम, शकरकंदी, कद्दू, पीली लाल शिमला मिर्च इत्यादी को शामिल करें
  • विटामिन युक्त चीजें जैसे गाजर, मूली का सेवन करें।
  • गाढ़ी हरे पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें इनमे विटामिन , बी, सी, आयरन, कैल्शियम और फाइबर इत्यादि भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और ड्राई फ्रूट्स का सेवन करें।

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