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आयुर्वेद के अनुसार खान-पान पर रखे लगाम, बीमारियां नहीं करेंगी परेशान

आयुर्वेद किसी के पथ्य या जीवन शैली (भोजन की आदते और दैनिक जीवनचर्या) पर विशेष महत्त्व देता है। मौसम मे बदलाव के आधार पर जीवनशैली को कैसे अनुकूल बनाया जाए इस पर भी आयुर्वेद मार्गदर्शन  देता है।

आयुर्वेद के अनुसार दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए समय पर हितकारी और मौसम के अनुसार ही भोजन करना चाहिए। इसलिए खानपान ऐसा करें, जो स्वास्थ्यप्रद हो। ऐसे बहुत से खाद्य पदार्थ हैं, जिन्हें मौसम के अनुसार खाना चाहिए, अन्यथा शरीर में विभिन्न प्रकार के रोग पनपने लगते है। जैसे की गर्मियों में तापमान के बढ़ते ग्राफ के साथ ही खानपान में लापरवाही बरतनी शुरू हो जाती है। सही समय पर खाना न खाना, बाहरी चीज़ों का ज्यादा इस्तेमाल करना जैसे की डिब्बा बंद भोजन का सेवन करना, बर्गर, पिज़्ज़ा इत्यादि का ज्यादा सेवन करना, बासी खाने का सेवन करना जैसी चीजों के कारण फ़ूड पॉइजनिंग जैसी समस्या हो जाती है। पहले ये समझने की आवश्यकता है की फ़ूड पॉइजनिंग क्या है और कैसे होती है ?

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गर्मियों के मौसम में उल्टी, दस्त, बुखार, पेट दर्द जैसी समस्याएं सामने आने लगती है लेकिन हम ये बात समझ ही नहीं पाते हैं की ये समस्या आखिर किन कारणों से हुई है ? जबकि इसका मुख्य कारण है खानपान में गड़बड़ी। फूड पॉइजनिंग एक आम समस्या है लेकिन कुछ मामलों में यह बहुत गंभीर भी हो सकती है जिसके कारण व्यक्ति की मौत भी हो जाती है। ये समस्या शरीर में पित्त बिगड़ने की वजह से होता है।

आयुर्वेद के अनुसार पित्त दोष शरीर की चयापचय क्रियाओं को नियंत्रित करता है। पानी और अग्नि से बना यह दोष पाचन की प्रक्रिया को नियमित करने में मदद करता है। लेकिन पित्त के बढ़ जाने से डायरिया, एसिडिटी, जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन घबराइए नहीं क्‍योंकि कुछ जड़ी-बूटियों के उपयोग पित्‍त दोष को संतुलित किया जा सकता है।

फूड पॉइजनिंग के मुख्य लक्षण :-

  • पेट में मरोड़ (cramps)
  • डायरिया
  • उल्टी
  • भूख न लगना
  • हल्का बुखार
  • कमजोरी
  • सिरदर्द होना
  • जी मिचलाना
  • बेहोसी महसूस होना

इन लक्षणों के अलावा सुस्ती, ब्लड प्रेशर और शरीर में रक्त की कमी होने पर भी सतर्क होने की आवश्यकता होती है। जैसे-जैसे ये लक्षण गंभीर होते दिखाई देते है तो लापरवाही बरतनी खतरनाक साबित हो सकती है।

आयुर्वेद के अनुसार इनसे बचने के उपाय   :-

आयुर्वेद कहता है कि अगर पित्त का दोष है, तो आपको बादाम, अनाज, हरी सब्जियां, नारियल, सलाद और दलिया का सेवन करना चाहिए

  1. हरीतकी का चूर्ण :- सुबह शाम हरीतकी का चूर्ण लेने से पिट से संबंधित रोग ठीक होते है।
  2. नींबू में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, इसलिए इसका सेवन करें, यह आपके पूरे शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता हैं। इसके अलावा, फूड पॉइजनिंग का कारण बनने वाले विषाणुओं से छुटकारा दिलाने में मदद करता हैं।
  3. तुलसी में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जो फूड पॉइजनिंग में राहत पहुंचाते हैं। यह आपके पेट को भी आराम पहुंचाता है और फूड पॉइजनिंग के लक्षणों को दूर करता है।
  4. फ़ूड पॉइज़न होने पर दिन में आप लहसुन की कच्ची कली का सेवन कर सकते हैं इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण होते हैं, जो खाने से हुए रोगों को दूर करने में मदद करता हैं।
  5. विटामिन-सी में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो आपके शरीर से बैक्टीरिया और टॉक्सिन दूर करने में मदद करते हैं । यही कारण है कि विटामिन-सी फूड पॉइजनिंग होने पर काफी फायदा पहुंचाता हैं। अगर आप विटामिन-सी के सप्लीमेंट नहीं लेना चाहते, तो विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक करें।
  6. आंवले में फूड पॉइजनिंग के दौरान होने वाली जी-मिचलाने और उल्टी आने की समस्या से राहत दिलाने में आंवला आपको फायदा पहुंचा सकता है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन-सी होता है।यह पेट की समस्याओं को भी दूर करता है।
  7. अदरक का सेवन करना इस समस्या में बहुत लाभकारी रहता है।अदरक में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जो खाने से हुई समस्या को ठीक करने में मदद करता हैं।
  8. जितना हो सके पेय पदार्थ पीजिए- पानी, डिकैफनेटेड चाय या जूस जो भी आप पी सकते हैं वो लें इससे आप तरल पदार्थ की कमी दूर कर सकते हैं और निर्जलीकरण को रोकने में भी ये मददगार होगा।
  9. शराब, दूध या कैफीनयुक्त पेय पदार्थों को पूरी तरह अवॉयड करने की कोशिश करें।
  10. तुलसी में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जो फूड पॉइजनिंग में राहत पहुंचाते हैं। यह आपके पेट को भी आराम पहुंचाता है और फूड पॉइजनिंग के लक्षणों को दूर करता है। फूड पॉइजनिंग का यह उपाय काफी कारगर हो सकता है।
  11. फूड पॉइजनिंग में उल्टी, दस्त लगते हैं, तो शरीर में पानी की कमी होने लगती है। अगर शरीर में पानी की कमी हुई, तो समस्या और बढ़ सकती है। ऐसे में जरूरी है कि आप तरल पदार्थ का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें। इसके अलावा आप नारियल पानी भी पी सकते हैं।

ध्यान रखें :-

गर्मियों के मौसम में कम और शुद्ध खाना ही सबसे बेहतर उपाय है। पेट खराब होने पर फैट और कम फाइबर वाली चीजों का सेवन करें क्योंकि अत्यधिक फैट को पचाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में केला, चावल, केला आदि का सेवन करना चाहिए।

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One thought on “आयुर्वेद के अनुसार खान-पान पर रखे लगाम, बीमारियां नहीं करेंगी परेशान

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