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अंतराष्ट्रीय महिला दिवस

जैसा की आप जानते है कि आज का दिन 8 मार्च पूरे विश्व में महिला अंतराष्ट्रीय दिवस के रूप मे मनाया जा रहा है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य महिलाओं के लिए प्रेम, त्याग आत्मविश्वास एवं समाज के प्रति उनके बलिदान एवं समर्पण के लिए उनके प्रति सम्मान प्रदर्शित करना है अगर बात 20वी शताब्दी की करें तो महिलाओं का जीवन पुरूषों के समान इतना आसान नही था बल्कि बहुत ही संघर्ष पूर्ण रहा है। समाज पितृसत्तात्मक होने के कारण महिलाओं को हमेशा पर्दे के पीछे और चार दीवारी में ही सीमित रह कर अपना जीवन व्यतीत करना पड़ता था लेकिन उस दौर में भी कुछ महान महिलाएं एसी हुई है जिनका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है जैसे रानी लक्ष्मीबाई जिन्होने अपनी पीठ पर बच्चे को बांध कर अकेले ही पूरी बहादुरी से अंग्रेजों के साथ युद्ध में अपना लोहा मनवाया था, इंदिरा गाँधी जिन्होने 15 साल भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री के रूप में देश चलाया और इसी श्राखंला में भारत की कोकिला कही जाने वाली सरोजनी नायडू और संगीत की दुनीया में प्रख्यात माँ सरस्वती का आर्शिवाद लिए लतामंगेशकर जी जिनकी आवाज की पूरी दुनिया कायल है इन सभी ने वर्षों से अपनी प्रतिभा का पर्चम लहराया है और इसी में बात आज के वर्तमान समय की करे तो खेल के क्षेत्र में सानिया मिर्जा, मिताली राज, मैरी कॉम, गीता फोगाट, राजनीति के क्षेत्र मे श्रीमती प्रतिभा पाटिल वर्तमान समय में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, वसुधरा राजे, स्मृति इरानी आदि न जाने कितनी ही महिलाएं देश की सेवा में समृपित है और सौन्दर्य के क्षेत्र में रीता फारिया, सुष्मिता सेन,ऐश्वर्या राय ,प्रियंका चोपड़ा आदि ने भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है, हर क्षेत्र में चाहे वह खेल हो,राजनीति हो , सौन्दर्य हो, गायन हो या महिलायें अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास के साथ दुनिया में प्रसिद्धि पा रही हैं !

आज के समय में औरत को बड़े ही आदर और सम्मान की भावना के साथ देखा जाता है वह औरत ही है जो अकेले दो-दो परिवारों को संभालती है और वह अपना हर रिश्ता चाहे वह माँ का हो, बहन का हो, बेटी का हो, बहु का हो,पत्नी का हो या चाहे कोई भी रिश्ता हो पूरे त्याग और समर्पण के साथ निभाती है और भारत तो एक ऐसा देश है जहाँ औरत को सदियों से देवी के रूप में पूजा जाता है ! माँ भारती, भारत माता यहाँ तक की हमारी मातृ भाषा जो की बड़े गौरव और सम्मान के प्रतीक हैं इन्हें भी औरत अर्थात माँ के रूप में देखा जाता है ! अंत में महिलाओं के सम्मान में यह दो पंक्तियाँ समर्पित हैं

 

“अब वक्त गया है, मिलकर ये पुकारा जाए ” 

औरत तो सर का ताज हैइसे यूँ ही संवारा जाये

महिला सशक्तिकरण को हम सबका नतमस्तक नमन

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